-- आगामी कार्यक्रम --

1) 9Nov - 17Nov
राम बालक जी महाराज जयपुर वृन्दावन

2) 19Nov-26Nov
जयेश भाई जोशी मुंबई

3) 7Dec-28Dec
माँ भवानी मंदिर आचार्य भोपाल द्रिवेदी छत्तीसगढ़

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* स्थल वर्णन *
श्री ललिता देवी
श्री चक्रतीर्थ
* प्रमुख स्थल *
श्री भूतेश्वर नाथ महादेव
श्री मॉ आनन्दमयी आश्रम
श्री स्वामी नारदानन्द आश्रम
श्री सीता रसोई मन्दिर
श्री देव देवेश्वर-महादेव
हत्या हरण
श्री चक्रतीर्थ
   

पृथिव्यां नैमिद्गां तीर्थ मन्तरिक्षे च पुष्करम्‌।
चक्रतीर्थस्तु महाबाहो पाताल तले बिन्दु

स्कन्द पुराण
प्रथमं नैमिद्गां पुण्यं चक्रतीर्थं च पुष्करम ।
अन्योषां चैव तीर्थाना संखया नास्ति महीतेला ॥
देवी भागवतम्
 

तीर्थ मनुष्य को नाना प्रकार के पापों से विमुक्त करके अपार भवसागर से पार करता हैं अथवा ये भी कह सकते है कि जो मनुष्य को संसार सागर से तैरने के लिये उपयुक्त सधान है तीर्थ॥
                                                        नैमिषारण्य का पवित्र तीर्थ चक्रतीर्थ माना जाता है। यह भगवान ब्राम्हा के चक्र की नेमि से निर्मित हैं। चूंकि इस महान आरण्य से चक्र की नेमि (धुरी) शीर्ण हुयी। इस कारण इस आरण्य का नाम नैमिषारण्य पड़ाजिस स्थान पर चक्र की नेमि ने पृथ्वी का भेदन किया इस स्थान पर पृथ्वी से जल की धारा प्रवाहित हो चली वही स्थान चक्रतीर्थ के नाम से विखयात हुआ। महाभारत में भी चक्रतीर्थ का वर्णन है। ब्रहा्रपुराण तथा स्कन्द पुराण में भीचक्रतीर्थ का वर्णन मिलता है।

चक्रतीर्थ महापुण्यं सर्वपाप प्रणाच्चनम्‌।
वर्तते मध्यभागे तु पृथिव्यां सर्वनाथकम्‌॥

  • चक्रतीर्थ से स्नान करके मनुष्य सब पापों से छूट जाता है।
  • चक्रतीर्थ अत्यन्त प्राचीन एंव पवित्र तीर्थ है।
  • चक्रतीर्थ में दान करने से मनुष्य की संसारिक बाधाएं दूर होती है।
  • कलियुग में चक्रतीर्थ का बहुत महत्व है।
  • चक्रतीर्थ में हर अमावस्या को स्नान करने से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त
    होता है।